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Sunday, December 13, 2009

पानी रे पानी....

हालात को देखते हुए ये सपष्ट है की अगला विश्व युद्ध पानी के लिए ही लड़ा जाएगा.पूरे विश्व में ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रभाव से ग्लेशियर पिघल रहे है.पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ने से हिमखंड .पिघलते जा रहे है.इससे जहाँ नदियों में पानी की .मात्रा बढ़ रही है वहीँ बहुत से शहरों के डूबने का खतरा हो गया है.समुन्द्र के जल स्तर में मामूली सी बढ़ोतरी से अनेक शहर और देश डूब जायेंगे।
अब इस कहानी का दूसरा पहलू भी है.पूरे विश्व में पीने योग्य जल की भारी कमी हो गई है .समुन्द्र का पानी जहाँ बढ़ता जा है वहीँ पेय जल घटता जा रहा है..शहरों में जहाँ पीने का पानी नहीं मिल रहा वहीँ गाँवों में खेती के लिए भी पानी नहीं है.किसान नित रोज आन्दोलन कर रहे है लेकिन सरकार बेबस है क्योंकि नहरों में जल सिमित है.पानी अमृत के समान कीमती हो गया है.हमारे राजस्थान में तो पानी को अमृत ही माना जाता है.दूर दूर तक फैले टीलों और तपती धूप में पानी की एक बूंद प्यासे के लिए अमृत से कम नहीं है.देश में पानी का संकट इतना बढ़ गया है कि बड़े बड़े शहरो में एक समय ही जल आपूर्ति की जा रही है.
पानी के लिए हाहाकार के बीच बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने प्यास को भी बेचने या भुनाने का धंधा शुरू कर दिया है.पानी की एक बोतल को दस दस रुपये में बेचा जा रहा है.एक ऐसे देश में जहाँ लोग प्यासों के लिए प्याऊ खुलाते थे ,वहां आज पानी को भी बेचा जा रहा है। राजस्थान के सुदूर किसी गाँव में ,जहाँ पानी बहुत कीमती है ...वहां पर भी आप को प्याऊ दिख जायेंगे पर यहाँ देखिये प्यास को भी बेचा जा रहा है .इस सब के बीच हर जगह जल कि बर्बादी देख के भी दिल दुखता है.हमने अभी भी जल का महत्त्व नहीं सीखा.तभी तो जितना काम लेते है उससे कहीं ज्यादा जल हम व्यर्थ में बहा देते है.अभी भी हमने पेय जल का महत्त्व नहीं समझा है,तभी तो पीने वाले पानी से ही हम कपड़े धोते है ,छिडकाव करते है और गाड़ियाँ भी धोते है ..हमें कल के लिए आज ही सोचना होगा...