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Saturday, November 7, 2009

राज के बाद अब शिवराज...




ये तो होना ही था!राज ठाकरे ने जो .आग लगाई थी,वो तो बढ़नी ही थी !अब मध्यप्रदेश में भी शिवराज सिंह उसी राह .पर चल पड़े है! जब राज क्षेत्रीयवाद को भुना सकते है तो फ़िर शिवराज क्यों नहीं? महाराष्ट्र में राज की पीठ थपथपाने वाली कांग्रेस यहाँ विरोध कर रही है! ये देश की राजनीती में ..एक नया तूफ़ान .है इस तरह तो सभी राज्य अपनी अपनी डफली बजाने लगेंगे,जिसका सीधा नुक्सान देश की एकता को पहुंचेगा!क्षेत्रीय वाद की ये आंधी धीरे धीरे बढती ही जायेगी...!पर नेताओं को इससे क्या...स्व हित को देश हित से बड़ा मानने वाले ये नेता कभी भी ,कुछ भी कह सकते है! अभी कुछ दिनों पहले दक्षिणी राज्यों में भी हिन्दी .के खिलाफ खूब जहर उगला गया था,वंदे मातरम पर भी विवाद चल ही रहा हैआखिर हम देश को कहाँ ले जाना चाहते है?ये नेता लोग आख़िर कब .समझेंगे ?शायद कभी नहीं.....!जब पूरे देश में लोग मिल जुल कर रहते आए है और रह रहें .है तो फ़िर ये नेता क्यों सबको लड़ाने पर तुले है ....ये अपनी समझ से बाहर है.....

Thursday, September 24, 2009

थरूर का गरूर....

थरूर साहब ने सही फरमाया....इकोनोमी क्लास तो सही में केटल क्लास ही है !जब हवाई यात्रा करने ही लग गए तो इकोनोमी क्लास क्यूँ?इससे क्या फर्क पड़ जाएगा?क्योंकि देश की अधिकांश जनता ने तो हवाई .ज़हाज़ को हवा में उड़ते ही देखा है,बैठे तो कभी है नहीं!उनके लिए तो हवाई यात्रा ही एक सपना है!उन्होंने तो ट्रेन में ही सफर किया है जो केटल क्लास से भी बदतर ही होगा!सवाल ये है कि बिजनेस क्लास या केटल क्लास से जनता का कौनसा भला होने वाला है !वो तो हवाई ज़हाज़ में ही नहीं चढ़ती!प्रधान मंत्री जी को चाहए कि वो नेताओं को ट्रेन में सफर कराये ताकि उन्हें पता चले कि केटल क्लास क्या होती है?.एस टी कि बसों और ट्रेन में सफर करके ही केटल क्लास को समझा जा सकता है!अब थरूर साहब काम का बौझ बता रहे है ,तो फ़िर ट्विटर के लिए टाइम कसे मिल रहा है?शायद उन्होंने ऑफिस में घिसते और पिसते बाबुओं को नहीं देखा,वरना ये शिकायत नहीं करते?जब नेता बन ही गए हो तो पहले देश को जानों.....!इतना दुखी होने से अच्छा है कि नेतागिरी ही छोड़ दे..वरना जनता है ना ये सब जानती है.....

Saturday, May 2, 2009

ये बेलगाम बोलते नेता....

सभी कहते है की ये चुनाव कुछ अलग है..!जी हाँ मैं भी कहता हूँ की ये अलग है,कई मायनो में अलग है..!एक दूसरे पर कीचड उछलने वाले नेता वही है..पर इस बार उनकी भाषा अलग है..!हो सकता है तेज़ गर्मी इसकी वजह हो पर बात कुछ अलग है..!इस तरह की बेकार भाष,शब्दावली मैंने पहले कभी नहीं सुनी,ये चीज़ अलग है..!सभी परशन के नेता जिस प्रकार की छिछोली भाषा पर उतर आए है वो हैरान करता है..!सुबह कुछ कह कर शाम को मुकर जन आम सी बात हो गई है..!लालू ,राबडी के बोलने पर इसे गाँव की भाषा कह कर नजरंदाज़ किया जाता था...पर अब अनुभवी और शिक्षित नेताओं के क्या हो गया?वे क्यों इस तरह से बोलने लगे..?और बोले तो भी जनता क्यूँ सुने ये ?आज भी हमारे देश में व्यक्ति पूजा हावी है..हम बहुत जल्दी ही किसी को अपना आदर्श मानने लग .जाते है..!जब ये आदर्श ही .असभ्यता पर...उतर आए तो फ़िर आम जनता क्या करे?.चाहे नेता हो या अभिनेता या खिलाड़ी हम उनका अनुशरन्न क्यूँ करें?हमारे बच्चे क्या सीखेंगे उनसे?यदि .हम उनकी बकवास नहीं सुनेंगे तो वो भी संभल कर बोलेंगे...इस तरह से वे अभद्रता नहीं कर पाएंगे...!अश्लील श्रेंणी की पिक्चर को "अ'सर्टिफिकेट दिया जाता है ताकि नाबालिग़ उसे ना देखे फ़िर इन नेताओं को क्यों सुने...!असभ्य भाषा बोलने वाले नेताओं को भी "अ" सर्टिफिकेट दिया जाना चाहिए..!पुन..गलती करने पर भाषण देने पर रोक भी लगाई जा सकती है....