Tuesday, March 9, 2010

कण कण में भगवान...फिर इनका क्या काम?

सभी तरफ इन बाबाओं के चर्चे है!इनकी विलासिता देख कर हैरानी होती है!झांसे देने में ये नेताओं से भी आगे निकल गए है क्यूंकि नेता तो खुद इनके चेले है!गरीबी और बेरोज़गारी के चलते इनका धंधा कभी मंदा नहीं होता!बस एक बात मेरी समझ से बाहर है क़ि आखिर इतना कुछ होने के बाद भी जनता का इनसे मोह भंग क्यूँ नहीं होता!
  पंजाब में आंतकवाद समाप्त होने के बाद तथाकथित ड़ेरों क़ी बाढ़ सी आ गयी थी,और अब ये इतने शक्तिशाली हो गए है कि स्थानीय राजनीती को प्रभावित करने लगे है!शुरू शुरू में लगभग सभी बाबा कथा वाचन से अपना कैरियर प्रारंभ करते है ..और जब भीड़ जुटने लग जाती है तो फिर ये अपनी असली भूमिका में आ जाते है!मुझे याद है किस तरह एक प्रसिद्ध डेरे पर लोग केवल इसलिए जाने लगे थे कि वहां आम जरूरत का सामान बाज़ार से सस्ता मिलता था!लोग २-३ दिन वहां घूमते थे और फिर राशन लेकर आ जाते थे!बाद में ये डेरा भी अनेकों विवादों में फंस गया..
                                                                                                    स्वामी नित्यानंद,भिमानंद अकेले ऐसे नहीं है,ये तो सामने आ चुके है!अभी न जाने कितने नाम सामने आने बाकि है!इस समस्या का समाधान यही है कि जनता इश्वर प्राप्ति के लिए इन ढोंगी बाबाओं का सहारा लेना छोड़ दे ,जो खुद  को भगवान् बताने लगते है!
आज गुरु कि खोज मुश्किल जरूर है लेकिन असंभव भी नहीं है!असाधारण ज्ञान रखने  वाले अनेको महापुरुष आम जन की तरह ही रह रहे है,बस जरूरत है उन्हें पहचानने की! इन ढोंगियों के कारण कितना नुक्सान हुआ है ,ये सोचने की बात है...  

10 comments:

Udan Tashtari said...

इनके कारनामों का विडियो देखा...अफसोसजनक!

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

एक बार काशीराम ने कहा था कि संसद जितनी अस्थिर होगी बसपा को उतना ही फायदा मिलेगा।


इन बाबाओं के बारे में भी ऐसा ही कुछ है। जितनी अशांति, जितनी बेरोजगारी, जितना दुख होगा, इनका धंधा उतना ही बढ़ता जाएगा।

निर्मला कपिला said...

इन बाबाओं के खिलाफ एक बडा अभियान चलाने की जरूरत है। रोज कुकुर्मुत्तों की तरह उग रहे इस झाड झंखार को साफ करना ही होगा। धन्यवाद

संजय बेंगाणी said...

जनता जितनी दुखी होगी, बाबा उतने ही मालदार होंगे.
मेरे घर में किसी बाबा की न तस्वीर है न कोई गुरू है. क्या हम अधर्मी हो गए हैं? मुझे बाबा लोग की जरूरत क्या है यही समझ नहीं आता.

vikas said...

बहुत ही विचारणीय लेख,पता नहीं इन बातो को लोग कब समझ पायेगें,इनके पास मजमा उन लोगो का लगा रहता है जो समय से पहले और बिना कर्म किये सब कुछ हासिल करना चाहते हैं.

विकास पाण्डेय
www.विचारो का दर्पण.blogspot.com

shama said...

Sahi kaha...aise baba logon se bachake rahna chahiye!

RaniVishal said...

sochane wali baat to yahi hai ki apane aap ko sanyasi , vairagi batane wale in babao ka jivan kitana vilasi hai yah to inke rahan sahan se dikh hi jata hai phir bhi inke aage itani bhid umad jati hai....!!
ye baba log to bhrasht netao se bhi jyada khatranaak hai kyuki neta aam adami ke vishwas ke sath khilwad karate hai aur ye baba unki aashta ke sath...!!

अमित जैन (जोक्पीडिया ) said...

हर धर्म में इस पार्कर के बाबाओ की बाढ सी आ गई है , अब इन से मुक्ति दिलाओ

Nitin Sabrangi नितिन सबरंगी said...

पाप का घड़ा कभी न कभी तो भरता ही है। बुरे आचरण का नतीजा भी बुरा ही होता है। नित्यानंद ने यही भुगता। जनता की भावनाओं से खेलने की सजा तो ऐसे भगवाधारी को मिलनी ही चाहिए।-नितिन सबरंगी

अनामिका की सदाये...... said...

duniya ko jagane ka bharsak prayatn..per duniya jaage tab na...

acchhi margdarshk rachna.badhayi.