आखिरकार अयोध्या मामले पर अदालत का निर्णय आ ही गया !हाई कोर्ट ने बहुत ही सही और संतुलित फैसला सुनाया जिसका स्वागत किया जाना चाहिए !इस मामले में ज़मीन के मालिकाना हक से ज्यादा लोगों की आस्था जुडी थी और राजनितिक पार्टियों के आने से ये और भी महत्त्व पूर्ण हो गया था ,लेकिन न्यायालय ने बखूबी अपनी जिम्मेवारी निभाई और एक एतिहासिक निर्णय सुनाया !क्यूंकि ये मामला बहुत वर्षों से लंबित था और इसमें बहुत सी चीज़ें जुडी थी उसे देखते हुए ये बहुत महत्वपूर्ण हो गया था !
न्यायालय ने तो फैसला सुना दिया ,अब जनता की बारी है कि वो इसका सम्मान करें तथा राजनितिक दलों को दूर रखते हुए खुद भाईचारा कायम रखे!इस फैसले से पूरे विश्व में भारतीय न्यायिक प्रणाली की एक साख बनी है !ये और भी महत्त्व पूर्ण है क़ि न्यायधीशों में भी दोनों समुदायों का प्रतिनिधित्व था !फैसला आने के बाद आम जनता ने संतोष ज़ाहिर किया और अमन चैन बनाये रखा .......लेकिन असली फैसला अब आएगा जब विभिन्न दलों के नेता अपनी अपनी रोटियां सेकने क़ि कोशिश करेंगे !बस तभी सावधानी रखने की जरूरत है क्यूंकि नेता किसी न किसी तरह इस मामले को जिन्दा रखने की कोशिश करेंगे !
भारत देश के लोगों ने जिस साम्प्रदायिक सद्भाव का परिचय दिया है...वो जारी रहना चाहिए ताकि देश में शांति तथा विकास साथ साथ चलता रहे...! हमारे देश का एक लम्बा गौरवशाली इतिहास रहा है जो आगे भी बना रहे ,इसके लिए जनता को ही आगे आना होगा...

11 comments:
बढ़िया .प्रस्तुति..... आभार.
अब हिंदी ब्लागजगत भी हैकरों की जद में .... निदान सुझाए.....
अभी तक भारतीय जनता ने बड़ी परिपक्वता का परिचय दिया है । आशा है आगे भी ऐसा ही होगा । शुभकामनायें ।
Insh'allah!
शांति तथा विकास साथ साथ चलता रहे...
सच कहा आपने............
चन्द्र मोहन गुप्त
एक बार फैसला शान्ति से हो गया आगे भी सारे कार्य शान्ति से ही हो जायेगे ....
बस अब इन्तजार है .......!!
ayodhya mamle ko ab smapt kiya jana chahiye.....shanti ke liye yahi aavayashk hai.
i agree with ts dral ji
kash aisa hi ho..... desh sabse badhkar hai....
ईश्वर से प्रार्थना करती हूं, कि सब इसी प्रकार समझदारी और शांति का परिचय देते हुए आगे के कार्य सम्पन्न करें.
लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।
जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!
मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।
भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!
अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।
थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।
http://umraquaidi.blogspot.com/
उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
“उम्र कैदी”
खेद है कि दोनों पक्षों ने इस फैसले को हल्केपन में लिया। अब जब फैसला आएगा,तो वह पीढ़ी इसे देखने के लिए शायद ही जीवित रहे(मुकदमों के फैसले में लगने वाले समय को देखते हुए) जो इसे नज़रंदाज़ करने के लिए ज़िम्मेदार हैं।
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