Tuesday, March 1, 2011

राष्टीय खेल या राष्ट्रीय शर्म ?

क्या आपको पता है की हमारे राष्ट्रीय खेल इस बार कहाँ हुए ?इन खेलों में किसने सबसे अधिक पदक प्राप्त किये ?और इन खेलों का शुभंकर [प्रतीक ] क्या था ?
शायद अधिकांश सवालों का जवाब न ही होगा ,क्यूंकि हम में से कोई भी इनमे रूचि नही लेता !यहाँ तक  की सरकार भी !कई बार टलने के बाद ये खेल अभी विश्व कप क्रिकेट के तूफ़ान के बीच शांति से हो गये और किसी को पता भी ना  चला !मिडिया भी इन खेलो को महत्त्व देने की बजाय विश्व कप क्रिकेट के पुराने आंकड़ो के जाल में उलझा रहा !
किसी भी देश की एक खेल निति होती है ,जिस पर चल कर ही राष्ट्रीय खिलाडी तैयार किये जाते है !विदेशों में तो मिडल स्तर के स्कूल से ही खिलाडियों को उनकी खेल रूचि के हिसाब से छाँट लिया जाता है ,फिर वे उसी खेल में महारत  हासिल करते है !हमारे यहाँ ऐसा कुछ नही है ...कुछ खिलाडी तो अपने स्तर पर ही तैयारी  करते रहते है !स्कूल और कॉलेज स्तर की खेल प्रतियोगिताएं महज खानापूर्ति के लिए होती है !इस सब का नतीजा ये होता है क़ि खिलाडी अपने खेल से दूर होता जाता है !प्रोत्साहन और मौके ना मिलने के कारण उसका प्रदर्शन गिरता ही जाता है !
राष्ट्रीय खेलों को सरकार किस गंभीरता से लेती है इसका अंदाजा इसी बात से चलता है क़ि इन खेलों को तीन बार तलने के बाद अनमने ढंग से अभी झारखण्ड में कराया गया !एक अच्छा आयोजन होने के बावजूद सरकार और मिडिया क़ि उपेक्षा के चलते ये यथोचित सम्मान नही पा सका !आज दुःख क़ि बात है क़ि हम से अधिकांश लोग इन खेलों से दूर रहे क्यूंकि इन्हें हाईलाईट किया ही नही गया !और रही सही क़सर क्रिकेट के  विश्व कप ने पूरी कर दी !देश के लिए खेलने वाले हजारों खिलाडियों के लिए ये खेल एक मजाक बन कर रह गए ...पैसा तो दूर ,उन्हें तो उचित सम्मान तक नही मिला ,जो क्रिकेट खिलाडियों को अक्सर खराब प्रदर्शन के बावजूद मिल जाया करता है ! 
यह हमारी रूचि क़ि ही बात है क़ि हमे ये तो पता है क़ि अगला विश्व कप फुटबाल और क्रिकेट या फिर ओलम्पिक कहाँ होंगे ?पर ये पता नही है क़ि अगले राष्ट्रीय खेल कहाँ होंगे ?इसी उपेक्षा के चलते राष्ट्रीय खेल अपना मुकाम हासिल नही कर सके !

4 comments:

डॉ टी एस दराल said...

बेहद अफ़सोस की बात है ।
ग्रास रूट लेवल पर जब तक ध्यान नहीं दिया जायेगा , ११८ करोड़ के देश में तब तक खेलों में प्रदर्शन सुधर नहीं पायेगा ।

rajesh said...

आपने सही कहा हे भैया क्रिकेट की सुनामी में सारे खेल तबाह हो गए ??

PRATEEK said...

govt shud do smthng about hockey and other games too

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

विचारणीय बात है..... सभी खेलों सामान रूप से फलने फूलने का मौका मिलना चाहिए ...... सार्थक प्रश्न उठाये हैं आपने