
आज के समाज में भी इतने विकास के बाद भी कन्या जनम को पाप .माना..जाता है.लड़कियों की संख्या घटती जा रही है फ़िर भी लोग समझ नहीं रहे है.आज ऐसा कोई काम नहीं है जो लड़कियां नहीं कर रही हो .फ़िर भी उनके साथ दोगला वयवहार किया जाता है.हम सब को पता है की जहाँ लड़के इतने लाड प्यार के बाद भी .बुढापे....में जहाँ .माँ...बाप को अकेला छोड़ देते हैं वहीं लड़कियाँ शादी के बाद भी माता पिता के संपर्क .में..रहती है और ताउम्र उनकी खिदमत में लगी रह्र्रहती है फ़िर भी उसे माना तो पराई ही जाता है क्यूं .काश इस पीड़ा को हमने समझा होता.अगर म लड़कियों की परवरिश भी लड़कों की भाँती करें तो वो भी लड़कों से कम नहीं होगी बस बात तो नजरिया बदलने की है.....
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