Friday, December 24, 2010

क्या हाल हो गया देश का ?

आजकल  के  हालात  देख  कर  विश्वाश  नही होता कि ये वोही भारत देश है !सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है..!युवा पीढ़ी तो तेजी से बदल ही रही थी ,अब तो सामाजिक परम्पराएँ और मूल्य भी बदलने लगे है !इनमे से कुछ लाभदायी है तो कुछ हानिकारक भी है !
अब देखिये प्याज हमारी पहुँच से दूर है ,जबकि मोबाइल सिम फ्री मिल रही है !एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को हम तक पहुँचने में घंटों लग जाते है जबकि 'पिज्जा' आधे घंटे में पहुँच जाता है !जूते आज ऍ .सी शो रूम में मिलते है जबकि सब्जियां फूटपाथ पर मिलती है !गली के हर मोड़ पर शराब मिल जाती है जबकि जरूरत पड़ने पर घायल को खून ढूँढने पर भी नही मिलता ?बाज़ार में मिलने वाले जूस में नीम्बू हो ना हो बर्तन धोने कि साबुन में नीम्बू होने का दावा किया जाता है और वो बिकती भी है !
यहाँ क्रिकेट खिलाडियों को खरीदने के लिए करोड़ों रुपैये खर्च किये जाते है जबकि लाखों करोड़ों लोग भूखे सड़क पर सोते है !क्या आपको मालूम है कि स्वीस बेंक में भारत का इतना पैसा ज़मा है उससे देश का २० सालों  का बज़ट तैयार हो सकता है ?हमारे यहाँ कार के लिए ८  %दर पर लोन मिलता है जबकि शिक्षा के लिए लोन दर १२%है क्यों?यहाँ बिजली से चलने वाले उपकरण सस्ते है जबकि बिजली महँगी है !शायद बदलते देश कि बदलती तस्वीर यही है...

6 comments:

डॉ टी एस दराल said...

रजनीश जी , हमारा देश एक रेखा है जिसका केंद्र बिंदु विकास है । हम यहाँ से दोनों दिशाओं में जा रहे हैं --बायीं ओर अवनति , दायीं ओर प्रगति ।
लगता है यह विकासशील देश हमेशा विकासशील ही रहेगा ।

mark rai said...

haan sir bilkul sahi baat rakhi aapne....aaj ki pidhi aur samaaj dono badal gaye hai...

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

जबाब नहीं निसंदेह ।
यह एक प्रसंशनीय प्रस्तुति है ।

mark rai said...

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

कुमार राधारमण said...

सुविधाभोगी वर्ग को तब भी सब कुछ नसीब हो ही जाता है। आम आदमी ही पिसता रहा है युग-युग से।

PRATEEK said...

u have presented gud stuff i wud love to hear from u in ur next article some measures some suggestions in the same context............